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चंद्रपुर में ‘इम्पोर्टेड डीजल’ का काला खेल: सरकार को करोड़ों का चूना, माफियाओं का बोलबाला!
CBI के हत्ते चढा रिश्वतखोर HPCL का टांगले! 1 लाख की घूस लेते पकडा गया
चंद्रपुर- (सुशांत घाटे )
औद्योगिक जिला चंद्रपुर इन दिनोंसफेदपोश माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ का अड्डा बन चुका है। जिले में ‘इम्पोर्टेड डीजल’ के नाम पर एक ऐसा सुनियोजित ‘गोरखधंधा’ चल रहा है, जिसने न केवल सरकारी खजाने को सेंध लगाई है, बल्कि पेट्रोल पंप व्यवसायियों की कमर भी तोड़ दी है।
💢गुजरात से तस्करी: रोजाना 20 टैंकरों का ‘खूनी’ खेल!
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रोजाना गुजरात से तकरीबन 20 टैंकर अवैध डीजल चंद्रपुर की सीमाओं में प्रवेश कर रहे हैं। यह जाल इतनी चालाकी से फैलाया गया है कि राजुरा, सास्ती और पडोली जैसे इलाके इस काले कारोबार के मुख्य केंद्र बन चुके हैं।
💢क्या है खेल?👇
जो डीजल औद्योगिक इकाइयों (फैक्ट्रियों, जैसे हल्दीराम आदि) के इस्तेमाल के लिए रियायती दरों पर ‘इम्पोर्ट’ दिखाया जाता है, उसे खुलेआम ट्रकों और निजी वाहनों में भरा जा रहा है।
बाजार में डीजल की कीमत के मुकाबले, यह अवैध डीजल मात्र 60 रुपये प्रति लीटर के आसपास बेचा जा रहा है।
रोजाना 50 लाख से 70 लाख रुपये का अवैध लेनदेन हो रहा है। पिछले डेढ़ साल में सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व (Tax) का चूना लगाया जा चुका है।
💢वाहनों के इंजन से खिलवाड़, पंप मालिक बेहाल!
सस्ता होने के कारण बड़े ट्रांसपोर्टर इस मिलावटी और अवैध डीजल की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन यह डीजल वाहनों के इंजन को बुरी तरह बर्बाद कर रहा है। वहीं, वैध तरीके से व्यापार करने वाले पेट्रोल पंपों की सेल में भारी गिरावट आई है, जिससे वे बर्बादी की कगार पर हैं।
“सफेदपोश माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की यह जुगलबंदी चंद्रपुर की अर्थव्यवस्था और वाहनों की सेहत, दोनों को खोखला कर रही है। अब समय है कि जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियां इन ‘मिलावटखोरों’ पर नकेल कसें।”
💢: इम्पोर्ट डीजल का ‘काला गणित’: कैसे, कहाँ से और क्यों?
यह खेल शुद्ध रूप से ‘टैक्स चोरी’ और ‘नियमों के उल्लंघन’ पर आधारित है। इसे निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. कहाँ से आता है यह डीजल?
यह डीजल मुख्य रूप से गुजरात के कांडला और मुंद्रा जैसे बंदरगाहों (Ports) के जरिए भारत आता है। इसे तकनीकी भाषा में ‘बेस ऑयल’ (Base Oil) या ‘लो-स्पीड डीजल’ (LSD) के नाम से मंगाया जाता है। माफिया इसे खाड़ी देशों (जैसे दुबई या ओमान) से निजी कंपनियों के माध्यम से इम्पोर्ट करवाते हैं।
💢 कागजों पर ‘इंडस्ट्रियल ऑयल’, सड़कों पर ‘डीजल’!
कानूनन, यह तेल केवल फैक्ट्रियों में भट्टी (Furnace) जलाने या औद्योगिक मशीनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि यह सीधे वाहनों के लिए नहीं होता, इसलिए इस पर GST और वैट (VAT) की दरें बहुत कम होती हैं और इस पर ‘रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस’ नहीं लगता।
खेल: माफिया इसे कागजों पर किसी ‘फैक्ट्री’ (जैसे हल्दीराम या कोई केमिकल प्लांट) के नाम पर मंगाते हैं, लेकिन फैक्ट्री पहुँचने के बजाय ये टैंकर सीधे चंद्रपुर के गुप्त ठिकानों (राजुरा, सास्ती, पडोली) पर खड़े कर दिए जाते हैं।
💢 गुजरात से चंद्रपुर का सफर!
फर्जी ई-वे बिल: टैंकरों के साथ अक्सर फर्जी ई-वे बिल (E-way Bill) होते हैं जिनमें गंतव्य कुछ और दिखाया जाता है।
सेटिंग का जाल: गुजरात से महाराष्ट्र की सीमा पार कराते समय ‘इंट्री’ का खेल चलता है। चंद्रपुर के औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ डीजल की भारी खपत है, जिसका फायदा माफिया उठाते हैं।
💢: डंपिंग और फिलिंग सेंटर्स (अवैध अड्डे)
👉चंद्रपुर जिले के राजुरा, सास्ती और पडोली जैसे इलाकों में सुनसान जगहों पर या बड़े गोदामों के पीछे ‘अवैध डंपिंग यार्ड’ बनाए गए हैं।
यहाँ टैंकरों से डीजल निकालकर सीधे बड़े ट्रकों, डंपरों और माइनिंग में लगे वाहनों में पाइपों के जरिए भरा जाता है।
कीमत का अंतर: सरकारी पेट्रोल पंप पर डीजल ₹90-95 है, जबकि यह ‘इम्पोर्टेड तेल’ ₹60-65 में मिलता है। यह ₹30 का अंतर ही माफियाओं की काली कमाई का जरिया है।
💢: वाहनों को नुकसान क्यों?
पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल (BS-VI) को रिफाइन किया जाता है और उसमें सल्फर की मात्रा बहुत कम होती है। इसके विपरीत, यह इम्पोर्टेड तेल:
अनफिल्टर्ड (Unfiltered) होता है।
इसमें लुब्रिकेशन की कमी होती है, जिससे ट्रक के फ्यूल पंप और नोजल जल्दी खराब हो जाते हैं।
यह इंजन की उम्र आधी कर देता है और प्रदूषण बहुत ज्यादा फैलाता है।
💢CBI का बड़ा प्रहार: रिश्वतखोर HPCL अधिकारी प्रतीक टांगले 1 लाख लेते हुये रंगेहाथ गिरफ्तार!
एक तरफ डीजल माफिया सक्रिय हैं, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के अधिकारी प्रतिक टांगले को सीबीआई (CBI) ने एक पेट्रोल पंप धारक से रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया है। दो लाख रुपयोकी रिश्वत मांगने वाला टांगळे 1 लाख रुपये लेते हुये पकडा गया है!
💢 छापेमारी में कैश बरामद
सूत्रों के अनुसार, टांगले ने एक पेट्रोल पंप के काम के बदले रिश्वत की मांग की थी। जाल बिछाकर की गई इस कार्रवाई में अधिकारी को मौके पर ही धर दबोचा गया।
कड़ी कार्रवाई: चंद्रपुर में शुरू हुई इस कार्रवाई ने सरकारी महकमों में हड़कंप मचा दिया है।
पुराना रिकॉर्ड: बताया जा रहा है कि इस अधिकारी पर पहले भी भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप लग चुके हैं। सीबीआई को छापेमारी के दौरान टांगले के आवास से भारी मात्रा में नकदी (Cash) बरामद होने की भी जानकारी मिल रही है।
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